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अमेरिका से डिपोर्ट होकर भारत लौटे अप्रवासी 20 देशों में नहीं जा सकेंगे, लगा प्रतिबंध..

अमेरिका ने भारतीय नागरिकों को हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़ भेजा वापस ! कड़ी चेतावनी भी दी..

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश से अवैध अप्रवासियों को डिपोर्ट करना शुरू कर दिया है. अमेरिका ने अपने सैन्य विमान C-17 के जरिए बुधवार (5 फरवरी) की दोपहर को 104 भारतीय अप्रवासियों को वापस भारत भेज दिया है. हालांकि अब यह सवाल उठ रहा है क्या अमेरिका के भेजे गए इन अप्रवासियों पर भारत में भी कोई कार्रवाई होगी? क्या इनकी पुलिस जांच होगी और क्या ये सभी अप्रवासी दोबारा कभी अमेरिका जा पाएंगे?

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क्या फिर से अमेरिका वापस जा पाएंगे अप्रवासी?

रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स ने बताया कि अमेरिका से वापस भेजे गए सभी अप्रवासी भारतीयों का बायोमीट्रिक स्कैन किया गया है. वहीं, अब ये सभी अप्रवासी भविष्य में कभी अमेरिका नहीं जा पाएंगे. अगर ये वैध डॉक्यूमेंट्स के साथ भी अमेरिका जाने की कोशिश करेंगे, तो इन्हें वीजा नहीं मिल पाएगा.

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उल्लेखनीय है कि अमेरिका की वीजा पॉलिसी को कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन समेत दुनिया के 20 देश फॉलो करते हैं. इसलिए इन अप्रवासियों को अब इन सभी देशों में भी एंट्री नहीं मिल पाएगी.

क्या भारत में अप्रवासियों पर दर्ज होगा केस?

एक्सपर्ट्स ने कहा कि इन लोगों पर भारत में कोई केश दर्ज नहीं किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने अमेरिका की जमीन पर अपराध किया है, भारत में नहीं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों की अमेरिका पहुंचने के तरीकों और भारत में किसी अपराध में संलिप्त होने की जांच पुलिस जरूर करेगी. उन्होंने कहा, “इनमें से कई लोग ऐसे हो सकते हैं जो भारत से वैध टूरिस्ट वीजा लेकर अमेरिका गए हों, लेकिन वहां अवैध रूप से रहने लगे या फिर किसी मानव तस्करी गिरोह के माध्यम से अमेरिका में प्रवेश किया हो तो ऐसे मामलों में पुलिस उन लोगों पर कानूनी कार्रवाई जरूर करेगी.”

चार तरह की हो सकती है कार्रवाई

एक्सपर्ट ने बताया कि अगर किसी अप्रवासी ने डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने के लिए पैसा दिया हो तो उन लोगों पर आयकर अधिनियम 1961 के तहत ईडी कार्रवाई कर सकती है. अगर पासपोर्ट में हेराफेरी का मामला हुआ तो नागरिकता अधिनियम 1955 और पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत कार्रवाई हो सकती है.

वहीं, भारत के बॉर्डर को अवैध रूप से पार करने वालों पर इमिग्रेशन अधिनियम 1983 के तहत कार्रवाई होगी या अगर भारत से भागने के बाद अवैध रूप से संपत्ति देश के बाहर ले गए तो सीमा शुल्क अधिनियम 1962 के तहत उन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है.

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अमेरिका ने भारतीय प्रवासियों के पहले बैच को सैन्य विमान से वापस भेजने की प्रक्रिया की शुरुआत की है, जिसने भारत में भारी विरोध उत्पन्न किया है। इस घटना में 104 भारतीय प्रवासियों को अमेरिका से भारत भेजते वक्त हथकड़ी और पैरों में बेड़ियों में जकड़ा गया था, जो लगभग एक दिन की लंबी उड़ान में थे। अमेरिकी सीमा गश्ती दल (USBP) ने इस प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें इन प्रवासियों के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार को दिखाया गया। वीडियो में देखा गया कि भारतीय नागरिकों को पूरी तरह से बंदी बना लिया गया है और उन्हें बेड़ियों में जकड़ा गया है, जैसे कि वे कोई अपराधी हों।

यूएसबीपी के प्रमुख माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, “अवैध प्रवासियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया है। यह अब तक की सबसे लंबी निर्वासन उड़ान है, और यह अमेरिका के आव्रजन कानूनों को लागू करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” इसके अलावा, वीडियो में एक कड़ी चेतावनी भी दी गई थी, जिसमें लिखा था, “यदि आप अवैध रूप से सीमा पार करते हैं, तो आपको हटा दिया जाएगा।” यह वीडियो और इसकी सामग्री भारत में विवाद का कारण बनी है। भारतीय मीडिया और विपक्षी पार्टियां इस व्यवहार को अमानवीय और अपमानजनक मान रही हैं। विपक्ष ने अमेरिकी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “अमानवीय” करार दिया और इसे भारतीय नागरिकों का अपमान बताया। भारतीय प्रवासियों के साथ इस तरह के बर्ताव को लेकर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, खासकर भारतीय प्रवासियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में इसे देखा जा रहा है।

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भारत में इस घटना को लेकर सरकार की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि कहा जा रहा है कि भारत सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है। भारतीय अधिकारी इस संबंध में अमेरिकी अधिकारियों से भी संपर्क कर सकते हैं और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का विचार कर सकते हैं। अमेरिका में हाल के वर्षों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं, और यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है। अमेरिका ने भारतीय नागरिकों सहित कई देशों के अवैध प्रवासियों को सीमा पार करके अपनी नीतियों का उल्लंघन करने के लिए वापस भेजने का निर्णय लिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी आव्रजन कानूनों को लागू करने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

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विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस तरह से लोगों को अपमानित करना और बेड़ियों में जकड़कर भेजना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उनका यह भी कहना है कि अवैध प्रवासियों के साथ इस तरह का व्यवहार अन्य देशों से संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। भारत में, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी अमेरिकी सीमा से अवैध रूप से सीमा पार करने के कारण परेशान हैं, इस वीडियो के सामने आने से और भी ज्यादा विवाद उत्पन्न हुआ है। अब भारत सरकार की ओर से यह देखना होगा कि वह इस मामले पर क्या कदम उठाती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के नागरिकों की रक्षा कैसे करती है।

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Vishal Leel

Sr Media person & Digital Creator
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